अपने अतीत को सहन करना सबसे बड़ी क्षमा है! "तुम सोने से पहले सबको क्षमा कर दो, तुम्हारे जागने से पहले मैं तुम्हें क्षमा कर दूँगा।" आज की हर प्रतिकूलता स्वयं के अतीत के संचयकोष से ही उभरकर आई है, अतः उसे सहना अपने अतीत को सहना ही तो है. क्या हम खुद को सहन कर पाते हैं ? नहीं ! यदि हम सभी अपने आपको सहन कर लें तो अपने जीवन के हर तनाव को सहन कर लेंगे स्वयं को न सहन कर पाने के कारण ही हम आवेशित हो जाते हैं, आक्रोशित हो जाते हैं, परेशान और खिन्न हो जाते हैं, जब भीतर में उठ रहे आवेग सहनशीलता की सीमा लांघ जाते हैं, तो हमारे भीतर की कुंठा और क्रोध बाहर निकलने लगता है और कभी कलह, तो कभी अपराध का रूप धारण कर लेते हैं. अपनी कुंठाएं न सह पाने पर इंसान दूसरों को शारीरिक आर्थिक हानि पहुँचाने का प्रयास करता है, कभी-कभी वह अपने प्रतिद्वन्द्वियों और शत्रुओं की हत्या तक कर देता है. बाहर अभि...
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